आज दिन की शुरुआत ऊर्जा के साथ हुई, लेकिन गुस्से के साथ शाम ढली,
कोशिश की थी गुस्से को काबू में करने की, लेकिन एक आवाज आँख से बोल पड़ी,
कि जो काम है आज करना, उसे करना ही होगा, नही तो ...............नही तो क्या ?
बस अब ...... सभी ने एक स्वर में हाँ कहा कि ...............और सहजता से काम हुआ
बस यही सोचकर सुबह बैठा था ...................
कोशिश की थी गुस्से को काबू में करने की, लेकिन एक आवाज आँख से बोल पड़ी,
कि जो काम है आज करना, उसे करना ही होगा, नही तो ...............नही तो क्या ?
बस अब ...... सभी ने एक स्वर में हाँ कहा कि ...............और सहजता से काम हुआ
बस यही सोचकर सुबह बैठा था ...................
Today I am happy to say that very soon restart blog
ReplyDeleteआरक्षण को लेकर स्वर्ण जाति वर्ग के लोग जो राजनीति से प्रेरित हैं वो चाहते हैं की अनुसूचित जाति को मिलने वाला आरक्षण ख़त्म कर दिया जाये और वापिस उसी दल दल में डाल दिया जाये जहाँ आजादी से पूर्व थे|
ReplyDeleteकुछ लोग ये झंडा उठा रहे है की आर्थिक आधार पर आरक्षण किया जाये, कुछ सवर्ण ये कहते हैं की हम दलितों का भला करेंगे इनसे आरक्षण हटवा कर|
उनको पुरानी यातनाओ की खबर नहीं है जब दलित समाज में कैसे रहते थे| यदि अनुसूचित जाति वर्ग सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक तोर पर यदि सक्षम हो गया तो निश्चित तोर पर उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए|
आज भी दुल्हे को घोड़ी से उतारा, जा रहा है, आज भी सक्षम राजनेताओ के समर्थक गरीबों को वोट नही देने देते, आज भी प्राइवेट नोकरी में उच्च पदों पर खास तरह के लोग आसीन हैं| अभी तक के सर्व बताते हैं की राजकीय नोकरी में भी उच्च पदों पर अनुसूचित जातियों के लोगो को मोका अहि मिल पा रहा है| समता समानता और न्याय के आधार पर कैसे देखा जाये या आंकलन किया जाये की अब अनुसूचित जाति सक्षम हो गयी है|मित्रो यह सामाजिक तोर पर बराबरी का हक़ पाने का मामला है|
मानलो कुछ लोगो की बात मान भी ली जाये कि आर्थिक आधार पर आरक्षण हो तो क्या आर्थिक सुधार कार्यक्रम में सरकार वंचित रहे लोगों की आहुति देकर सुधार करेगी| इस बारे में सोचना जरुर !!!!