एक बार एक साधू बाबा अपने शिष्यों के साथ घूमने निकले, अपनी धुन में चले जा रहे थे शाम हो गई भूख और थकान भी महसूस होने लगी, सामनें गाव दिख रहा था , थोड़ी राहत मिली की गांव में रहने व् खाने का इन्तजाम हो जायेगा, उम्मीद के साथ गांव में पहुंचे, साध् बाबा को देखकर पूरे गांव के लोगों ने पलक पांवड़े बिछा दिए तथा रहने खाने की भी अच्छी व्यवस्था की कोई कसर नहीं छोडी,रात हो गईं बाबा सो गए सुबह उठ कर चलने लगे तो शिष्यों ने कहा की लोगों ने इतना सम्मान दिया आप भी कुछ आशिर्वाद दो, बाबा ने सोचा और कहा की आपका गांव उजड़ जाये... ये सुनकर सन्नाटा छा गया, गांव के लोगों में कानाफूसी होने लगी की ऐसा हमने क्या कर दिया की बाबा ने हमे उजड़ जाने को कहा, लोग सोचते रहे बाबा ने अगले गांव की राह पकड़ ली, शिष्य भी सोच में पड़ गए लेकिन पूछने की हिम्मत नही हुई, चलते चलते फिर शाम हो गई, दूसरा गांव आया बाबा ने जो उम्मीद की उससे उल्टा हुआ, बाबा को देखते ही लोगों ने गाली देना व् पत्थर मारना शुरू कर दिया तथा रात में खाना व् रोकने की बात तो दूर भाग जाने को कहा, बाबा ने बिना कहे ही आशीर्वाद दिया की आपका गांव आबाद रहे और चल पड़े, चलते चलते शिष्यों ने हिम्मत जुटाकर पूछा की आपकी सेवा करने वालों को उजड़ जाने को व् गाली और पत्थर मारने वालों आबाद रहने को क्यों कहा?
ये ही सवाल सबसे है की बाबा ने ऐसा क्यों कहा होगा सोचिये ????????????
इसे आप कहां से जोड़कर देखते हैं............ओमपाल जी। वैसे कहानी का अंत आपने अच्छे से किया है कि लोग खुद से मॉरल ऑफ द स्टोरी निकाल लें उन पर थोपा न जाय़। लिखते रहिए। इसके लिए आपको शुभकामनाएं।
ReplyDeletetaki acche log sab jagah jakar logon ko acchayi k bare me samjhaye, or second sab bure log ek hi jagah rahen taki bahar burai na faile
ReplyDeleteकुछ नया लिखिए ओमपाल जी वास्तव मे ये अच्छी पहल है आपकी पर इस पर कुछ मोलिक आएगा तो मज़ा और बढ़ जाएगा। अच्छा लगा आपको ब्लॉग पर देख कर
ReplyDeleteविनोद